28 फरवरी को डीयू के 102 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि होंगे उप राष्ट्रपति डीयू के आर्ट्स फ़ैकल्टि में बनेगा सेंटर फॉर उड़िया स्टडीज़, आर्ट्स फैकल्टी में नवीनीकृत हाल का नाम होगा वंदे मातरम् हाल
दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद (ईसी) की 1280 वीं बैठक का आयोजन शुक्रवार, 12 दिसंबर, 2025 को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुआ। बैठक के आरंभ में अपने संबोधन में कुलपति ने बताया कि 28 फरवरी 2026 को होने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय की 102 वें दीक्षांत समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि होंगे। प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि उससे पहले 30 जनवरी को नशा मुक्ति अभियान को लेकर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भी माननीय उपराष्ट्रपति डीयू में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
बैठक के दौरान चीफ इंजीनियर अशोक सैनी ने विश्वविद्यालय में जारी निर्माण एवं नवीनीकरण कार्यों पर जानकारी प्रस्तुत की। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि करीब 2000 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय में विभिन्न कार्य प्रगति पर हैं। इनमें से अधिकतर निकट भविष्य में पूर्ण होने वाले हैं। इस दौरान कुलपति ने प्रस्ताव रखा कि आर्ट्स फैकल्टी में स्थित कन्वेंशन हाल का नाम नवीनीकरण के बाद वंदे मातरम् हाल रखा जाए। सभी ईसी सदस्यों ने इस बारे अपनी सहमति जताई। दिल्ली विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर उड़िया स्टडीज़ बनाने के लिए बनी कमेटी की सिफारिशों पर विचार के उपरांत उन्हें भी मंजूरी दे दी गई है। यह सेंटर डीयू की आर्ट्स फ़ैकल्टि में बनाया जाएगा।
इसके साथ ही कुलपति ने बताया कि 12 से 14 फरवरी, 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि यह देश का सर्वोत्तम समारोह हो। डीयू ईसी की बैठक के आरंभ में डीयू कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता ने पिछली ईसी बैठक के मिनट्स और एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत की। गत 05 दिसंबर को आयोजित हुई डीयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक में की गई सिफारिशों पर विचार करने के उपरांत उन्हें भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में शून्य काल के दौरान सदस्यों ने अपने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। बिल्डिंग कमेटी ने दिल्ली विश्वविद्यालय की वाइस रीगल लॉज बिल्डिंग के पास एक ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियो बनाने के प्रपोजल को मंजूरी दी है जिसकी अनुमानित लागत.2,32,08,537 रुपए है। डीयू ईसी ने इस प्रोजेक्ट को भी मंजूरी प्रदान की।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रखा गया 1651.42 करोड़ रुपए का बजट अनुमान
डीयू ईसी की इस बैठक में फाइनेंस कमेटी की 09 दिसंबर 2025 को आयोजित हुई बैठक में की गई सिफ़ारिशों पर विचार करने के उपरांत उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के संसोधित बजट अनुमान और वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान पर भी विचार करने के उपरांत उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। संसोधन के पश्चात वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट अनुमान 1664.74 करोड़ रुपए से घटाकर अब 1312.33 करोड़ रुपए रखा गया है इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1651.42 करोड़ रुपए का बजट अनुमान पेश किया गया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के ढाका कॉम्प्लेक्स में गर्ल्स हॉस्टल के लिए इस्तेमाल होगी खाली जमीन
दिल्ली विश्वविद्यालयने ढाका कॉम्प्लेक्स में कुल 3.7 एकड़ खाली जमीन को गर्ल्स हॉस्टल के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है। ईसी में एजेंडा प्रस्तुत करते हुए कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालयने ढाका कॉम्प्लेक्स वाली अपनी जमीन को साल 1975 में दिल्ली स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, स्कूल ऑफ़ कॉरेस्पोंडेंस कोर्स/स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग (एसओएल) और वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट (वीपीसीआई) को अलॉट की थी। शर्त यह थी कि अगर 3 साल के अंदर निर्माण कार्य नहीं हुआ, तो उसके बाद अलॉट की गई जमीन के पोजेशन का रिव्यू किया जाएगा।
अलॉट की गई जमीन में से दिल्ली स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क को 1.70 एकड़, स्कूल ऑफ़ कॉरेस्पोंडेंस कोर्सेज़/एसओएल को दो एकड़ और वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट को तीन एकड़ आवंटित की गई थी। एसओएल ने अलॉट की गई जमीन का पूरा इस्तेमाल किया था, जबकि वीपीसीआई ने सिर्फ़ एक एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया और दो एकड़ जमीन इस्तेमाल नहीं हुई है। वीपीसीआई की खाली जमीन के साथ गर्ल्स हॉस्टल कॉम्प्लेक्स भी है। गर्ल्स स्टूडेंट्स की सिक्योरिटी के लिए, वीपीसीआई की दो एकड़ जमीन और दिल्ली स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क की 1.7 एकड़ खाली जमीन (कुल 3.7 एकड़ खाली जमीन) को गर्ल्स हॉस्टल के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सेंटर फॉर उड़िया स्टडीज़ बढ़ाएगा भाषा, साहित्य, संस्कृति, सभ्यता और रीति-रिवाजों पर विचार-विमर्श का दायरा: प्रो. योगेश सिंह
दिल्ली विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर उड़िया स्टडीज़ बनाने के लिए बनी कमिटी की सिफारिशों पर विचार के उपरांत इसे मंजूरी दे दी गई है। यह सेंटर दिल्ली विश्वविद्यालय में फैकल्टी ऑफ़ आर्ट्स का हिस्सा होगा। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि यह सेंटर उड़िया भाषा, साहित्य, संस्कृति, सभ्यता और रीति-रिवाजों पर आने वाली पीढ़ियों और आज के नज़रिए से भी विचार-विमर्श का दायरा बढ़ाएगा ताकि इस ज्ञान के क्षेत्र को बेहतर ढंग से समझा जा सके। यह सेंटर करिकुलम डिज़ाइन और एकेडमिक प्रोग्राम को लागू करने के साथ-साथ डॉक्टोरल स्टडीज़ के लिए विद्यार्थियों के एनरोलमेंट को आसान बनाने के लिए फैकल्टी ऑफ़ आर्ट्स का हिस्सा होगा।
कुलपति ने बताया कि इस सेंटर द्वारा सेमेस्टर मोड में दो साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के तौर पर उड़िया में एमए शुरू की जाएगी। एनईपी 2020 के अनुसार, चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के हिसाब से एक साल के पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के बारे में आगे के तरीके ऑपरेशनल ज़रूरत के आधार पर बाद में तय किए जाएँगे। उड़िया स्टडीज़ के लिए एक नया सेंटर बनाने का मकसद पोस्टग्रेजुएट लेवल पर अच्छी क्वालिटी की शिक्षा देने के साथ ही उड़िया स्टडीज़ में डॉक्टरेट (पीएचडी) और पोस्टडॉक्टरल रिसर्च, दोनों लेवल पर अच्छी क्वालिटी की रिसर्च को बढ़ावा देना। इसके साथ ही इस सेंटर का उद्देश्य सर्टिफिकेट, डिप्लोमा के साथ-साथ पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम देना और अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 के ज़रिए अंडरग्रेजुएट लेवल पर उड़िया स्टडीज़ में जेनेरिक इलेक्टिव देना भी है ताकि समृद्ध उड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति को सही नज़रिए से लोकप्रिय बनाया जा सके। ऐतिहासिक नज़रिए से उड़िया भाषा, साहित्य, कला, आर्किटेक्चर, डांस, परंपराओं, फिलॉसॉफिकल प्रैक्टिस, सुधारवादी आंदोलनों, लोकगीतों, मौखिक परंपराओं के विकास का पता लगाने का काम भी यह सेंटर करेगा।
Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi



